बनाये अपनी जीवन यात्रा को यादगार

 

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कैसे बनाये अपनी जीवन यात्रा सुखद

हर इंसान को ज़िंदगी सिर्फ एक बार मिलती है फिर भी हम बहुत सारी उलझनों का जाल खुद के लिए बनाकर उसमे उलझते जाते हैं | ज़िंदगी की खूबसूरती का अहसास करने के लिए भी हमारे पास समय नहीं होता |जीवन की भागमदौड़ में एक समय ऐसा भी आता है जब हम जीवन जीना भूलने लगते हैं| आइये
अपनी जीवन यात्रा को यादगार बनाने के कुछ उपाय सीखते हैं| बस कुछ बातों का रखें ध्यान रखना होगा और विश्वास कीजिये कि आपकी जीवन यात्रा सुखद बन जाएगी |

1आइये .संख्याओं को दूर फेंक आते हैं जैसे- उम्र, लंबाई। इसकी चिंता से जुड़े पत्थरों को दूर फेंक आते है | चिकित्सा से जो ठीक हो सकता है ,उसपर विचार करें पर बेवज़ह के ख्यालों को पास भी फटकने ना दें |

2. केवल हँसमुख लोगों से दोस्ती रखिए। खड़ूस और चिड़चिड़े लोग आपको गलत सोच की तरफ धकेलते हैं|

3. हमेशा कुछ नया सीखते रहिए। कम्प्यूटर, शिल्प, बागवानी, आदि कुछ भी आपकी पसंद की चीज़ों के बारे में कुछ और जानने की कोशिश करते रहिये| खली समय में चाहे रेडियो ही सुंनिये।दिमाग को निष्क्रिय न रहने दें।खाली दिमाग शैतान का घर होता है|

4. सरल व साधारण चीजों का आनंद लीजिए।

5. खूब हँसा कीजिए – देर तक और ऊँची आवाज़ में।

6. आँसू तो आते ही हैं। उन्हें आने दीजिए, रो लीजिए, दुःख भी महसूस कर लीजिए और फिर आगे बढ़ जाइए। केवल एक व्यक्ति है जो पूरी जिंदगी हमारे साथ रहता है – वो हैं हम खुद। इसलिए जबतक जीवन है तबतक ‘जिन्दा’ रहिए।

7. अपने इर्द-गिर्द वो सब रखिए जो आपको प्यारा लगता हो – चाहे आपका परिवार, पालतू जानवर, स्मृतिचिह्न-उपहार, संगीत, पौधे, कोई शौक या कुछ भी। आपका घर ही वो जगह है जहाँ आप ज्यादा समय बितातें हैं |

8. अपनी सेहत को संजोइए। यदि यह ठीक है तो बचाकर रखिए, अस्थिर है तो सुधार करिए, और यदि असाध्य है तो कोई मदद लीजिए।

9. अपराध-बोध की ओर मत जाइए। जाना ही है तो किसी मॉल में घूम लीजिए, पड़ोसी राज्यों की सैर कर लीजिए या विदेश घूम आइए। लेकिन उस विचार की नगरी में कतई नहीं जाइये जहाँ खुद के बारे में सोचकर खराब लगने लगे।

10. जिन्हें आप प्यार करते हैं उनसे हर मौके पर बताइए कि आप उन्हें चाहते हैं; और हमेशा याद रखिए कि जीवन की माप उन साँसों की संख्या से नहीं होती जो हम लेते और छोड़ते हैं बल्कि उन लम्हों से होती है जो हमारे सांसों में बसे होतें हैं |

जीवन की यात्रा का अर्थ यह नहीं कि अच्छे से बचाकर रखा हुआ आपका शरीर सुरक्षित तरीके से श्मशान या कब्रगाह तक पहुँच जाय। बल्कि आड़े-तिरछे फिसलते हुए, पूरी तरह से इस्तेमाल होकर, सधकर, चूर-चूर होकर चिल्लाते हुए जब आपका शरीर कब्र तक पहुंचे तो आपका दिल बोल उठे – वाह यार, क्या यात्रा थी!

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