क्या कहूं ?

 

shallow focus photography of woman wearing blue and gold dress
Photo by Qazi Ikram Ul Haq on Pexels.com

बंद करता ,
हूँ जब ,
अपनी आंखे ,
तेरा चेहरा सामने आता है ,
जैसे बादलों को चीर कर ,
खिल जाती है कोई धुप !

क्या कहूं ?
जब बात करते करते ,
खुल कर हंस पड़ती हो ,
तुम प्रिय ,
खिल जाता है मेरा भी मन !
जैसे किसी मरुभूमि में ,
बारिश की पहली बून्द पड़ी ,
हो ,
जैसे किसी नन्हें पैरों ने ,
पहली बार पायलों की रुनझुन सुनी ,
हो !
क्या कहूं ?

कहती हो न तुम ,
कि मैं कुछ नहीं बोलता ,
कभी कर देता हूँ तुम्हें अनदेखा !,
सच कहूं तो कभी नहीं होता ऐसा ,
हर पल तेरे संग को जीता हूँ ,
हर पल घूंट घूंट पीता हूँ ,
तेरे बिन रीता रीता हूँ !
क्या कहूं ?

-अमृता श्री

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2 Comments

  1. क्या कहूं ?
    जब बात करते करते ,
    खुल कर हंस पड़ती हो ,
    तुम प्रिय ,
    खिल जाता है मेरा भी मन !
    जैसे किसी मरुभूमि में ,
    बारिश की पहली बून्द पड़ी ,
    हो ,

    वाह। दिल को गुदगुदाती पंक्तियाँ।👌👌

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