एक जादू की पुड़िया सी , तुम !

एक जादू की पुड़िया सी ,
तुम ,
गुम कर देती हो सारे गम !

तेरी हंसी ,
एक झरने सी ,
दर्द मिटा सी जाती है ,
क्लांत चेहरे से मेरे ,
थकन जैसे छू हो जाती है ,
ऊर्जा भर जाती हो ,

तुम !

तेरी बातें ,
गुड़ की डली सी
मीठा स्रोत कहीं से फूटा हो ,
मैंने आँचल में अपने, जैसे ,
दुनियाँ का खज़ाना लूटा हो ,
सब जगमग कर जाती हो ,
तुम !

–अमृता श्री

59178060_10216676044527783_8898142231139975168_n

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s