गिरहें

जिस तेजी से चलकर रजनी अपने बेटे बिट्टू के स्कुल से लेने गयी थी उसी तेजी से वापस भी आ गयी | आज स्कुल में एक घंटे क्लास बढ़ा दी गयी थी| इन दिनों वो काफी सुस्ती महसूस कर रही थी | वहां बैठने के बजाय वो घर की ओर वापस चल पड़ी |

धीरे से दरवाजे में चाभी लगाई ,दिनेश अंदर सो रहे होंगे | काम के सिलसिले में वो बाहर ही रहते है तो जब भी वो घर रहते है, वो उन्हें परेशान करना पसंद नहीं करती | हल्के पावों से सीढ़ी पर चढ़ ही रही थी कि अपने पति दिनेश की आवाज़ उसके कानो में पड़ी वो किसीसे बात कर रहे थे |

“चलो अच्छा है उठ गए है ,काफी दिनों बाद साथ साथ चाय पीयेंगे ” एक मीठी सी मुस्कान चेहरे पर आयी |

“समझा करो ,मैं पूरी कोशिश कर रहा हूँ यह दोनों माँ -बेटा जो मेरे लिए मुसीबत से कम नहीं कैसे मेरे मेरे गले से उतर जाएँ | पर अगर तुम ही ऐसी बात करोगी तो मैं हिम्मत हार जाऊंगा | इतने सालों से इनको सर पर ढोये जा रहा हूँ तो क्या ख़ुशी से ?जान थोड़ा सब्र करो | मेरी अच्छी जॉब है ,मैं इनसे एक प्लान की तहत ही छुटकारा पा सकता हूँ | ज़रा सी गड़बड़ हुई तो तुम और मैं साथ रहना तो दूर ,मुसीबत में पड़ जायेंगे सो अलग !अरे वो अभी नहीं आएगी ,पार्क में वो बिट्टू के साथ समय बिताती है ,मुझे पता है ,अभी वो आधे घंटे पहले आने वाली नहीं ,तुम ध्यान से मेरी बात सुनो | अभी दो महीने से दी हुई दवा का असर अब जाकर दीख रहा है | थकी थकी रहने लगी है अब ,कुछ दिनों में जब दिमाग शिथिल होगा और उलटे सीधे निर्णय लेने लगेगी तब डॉक्टर के पास ले जाऊंगा ,फिर जहाँ डॉक्टर ने मनोचिकत्सा शुरू की ,मेरे पास आधार होगा उससे और उसके बेटे से मेरा पीछा छूटेगा | दोनों को उसके मामा के यहाँ पटक आऊंगा | किसने कहा कि वो माँ बनने वाली है ? महीनो से हमारे संबंध नहीं बने ,बिट्टू भी क्या कोई प्यार की निशानी है ? तुम सब जानती हो | मेरे परिवार और उसके परिवार का कितना प्रेशर था मुझपर |फिर से प्रेग्नेंसी ? मेरा दिमाग ख़राब है क्या ?मैं इसे हटाने की तैयारी में लगा हुआ हूँ और तुम दूसरे बच्चे की बात कर रही हो ? बेवकूफों जैसी बातें मत करो जान ,तुमसे ज्यादा मैं तुम्हारे साथ जीने के ख्वाब देख रहा हूँ ” दिनेश की आवाज़ आई |

दिनेश अपनी प्लानिंग में लगा हुआ था ,उसे पता था कि रजनी इतनी जल्दी आने वाली नहीं | स्कुल घर से नजदीक है पर रजनी बिट्टू को बगल के पार्क में ले जाती है ,दोनों जूस पीकर कुछ आधे एक घंटे में आतें हैं |

सारी बात सुनकर रजनी पसीने में भींग गयी | यह कैसा आधार था उसके जीवन का जो उसके पैरों से जमीन खींचने पर तुला था | इतना ज़ोर का गुस्सा आया उसे लगा ऐसी ज़िंदगी का फायदा ही क्या ? नज़र किचेन नाइफ पर पड़ी लगा कि ऐसे दरिंदे को सांस लेने का कोई हक़ नहीं !

पसीने में तर -बतर रजनी घर से बाहर निकली | वो पेशोपेश में थी “क्या उसने ठीक किया ? उसे अपने शरीर से घिन आ रही थी जिसे कभी दिनेश की उँगलियों ने स्पर्श किया था | उसने हमेशा पर्स में रखी पानी की बोतल निकाली और रगड़ रगड़ के अपने हाथ पाँव को धोया | थोड़ी राहत मिली | स्कुल से थोड़ी दूर पर बने पार्क में बने बेंच पर कड़ी धुप में बैठी रही | आज उसे यह गर्मी बिलकुल नहीं ख़ल रही थी ,सूरज की तीखी रोशनी अपने दर्द सोखती लग रही थी | सामने बिट्टू स्कुल से आता दिख गया | मन थोड़ा शांत हो चला | आज उसके पैर अपने बच्चे के पास जल्दी से चलने में तेजी से बढे |आज उसने बिट्टू को ज़ोर से गले लगा लिया | बिट्टू को दूसरे बच्चे के सामने शर्म तो आ रही थी पर माँ का ऐसा करना उसे अच्छा भी लगा |
“मम्मा ” कहकर वो भी माँ से लिपट गया |

“चल मम्मा आज तुझे चिप्स खिलवाती है ” रजनी ने उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा |
“पर आप तो मुझे चिप्स कभी नहीं खाने देती हो “आंखे बड़ी करके बिट्टू ने कहा |

” आज खाते हैं ,मैं भी और तुम भी ” रजनी ने बात आगे बढ़ाई |
दोनों ने चिप्स खाये ,जूस पिया | सामने पार्क के झूले में आज वो देर तक खेले | बिट्टू अब घर जाना चाहता था ,रजनी के हाथों को पकड़ कर वो ख़ुशी ख़ुशी घर की तरफ बढ़ चला ,रजनी के शिथिल कदम घर की ओर घसीटते हुए बढ़ चले |

घर के सामने जमावड़ा लगा हुआ था | भीड़ को चीरती हुई अंदर पहुंची तो देखा पुलिस अंदर है ,उसकी सास से पूछताछ किये जा रही है | उसे देखते ही उसकी सास चिल्ला कर बोली “आ गयी महारानी सैर सपाटा करके | मेरे बेटे को खाकर अब आराम मिल गया होगा | इंस्पेक्टर साहिब इसीलिए यह मेरे बेटे को लेकर अलग हुई थी | इसीने मारा है मेरे बेटे को ”

“क्या हुआ दिनेश को ,अच्छे खासे सो रहे थे जब मैं गयी थी ,क्या कह रही हैं आप ” हकलाते हुए रजनी ने कहा |

“आप फ़ोन क्यों नहीं उठा रही थी ” इंस्पेक्टर की आवाज आयी तब उसे ध्यान आया की उसने तो फ़ोन साइलेंट कर छोड़ा था | तुरंत पर्स से मोबाइल निकाला तो देखा उसमे बीसियों काल थे |

“मेरा मोबाइल साइलेंट मोड पर है ” हिचकिचाते हुए रजनी ने कहा |

रजनी सकते में थी उसे ,पता ही नहीं चल रहा था कि जो उसके सामने चल रहा है वो सच है या झूठ !जिस आदमी के साथ विश्वास के फेरे लिए थे उसीने उसकी एक पैसे की कद्र नहीं की और कुछ क्षण पहले जिसके लिए उसके मन में इतना गुस्सा था ,उसके लिए उसके आंसू थम नहीं रहे | उसने उसे कभी अपना नहीं समझा पर उसने तो दिल की गहराईयों से उसे चाहा था |

रजनी के मनोभावों पर इंस्पेक्टर की पैनी दृष्टि थी | कुछ बात है ,चेहरे के भाव आँखों के आंसू सब कुछ इतना सरल नहीं है ,कुछ बात तो है | रजनी के सारे सवालों का जवाब इंस्पेक्टर ने तो दे दिया | रजनी ने दूर से ही दिनेश को देखा |

“पोस्टमार्टम के बाद आपको बॉडी मिल जाएगी ” इंस्पेक्टर का लहज़ा बर्फ की तरह ठंडा था |

कुछ दिनों में सारा कुछ ऐसे खत्म हो जाया और जीवन भी रीता हो गया | सारी प्रक्रिया मशीनी ही लगी ,जज़्बात आंसुओं में उमड़े और बेमोल गिरते रहे |
उसके ज़ज्बातों की तो कभी कोई कीमत नहीं रही थी ससुराल वालों के नजर में और अब वो यह भी जान गयी थी कि पति भी उसके प्रति साजिशों में लिप्त था| माँ -बाबा अब दुनियां में रहे नहीं और भाई भाभी से कोई सहयोग की उम्मीद नहीं थी ,उसने जब दिनेश की बातें सुनी थी तभी उसने तय किया था कि वो अपने पैरों पर खड़ी होगी और तथाकथित विवाह के दलदल से बाहर आएगी पर तब उसे कहाँ पता था कि ज़िंदगी कैसी करवट लेने वाली है ?

मैडम हम आपसे कुछ सवाल कर रहे हैं ,जवाब दें ” इंस्पेक्टर की पैनी नजर उसपर थी |

“मैं बता तो चुकी हूँ कि दिनेश सो रहे थे और मैं दरवाजे में बाहर से ताला लगाकर बिट्टू को स्कुल से लाने गयी थी ” रजनी ने बताया |
“पर स्कुल से तो पता चला कि उस दिन एक घंटे की एक्सट्रा क्लास लग गयी थी ,आपने क्या किया ,वहीँ बैठी रही ? इंस्पेक्टर ने दूसरा सवाल दागा |

जी हाँ “घबराहट में उसके मुँह से निकल गया | माथे पर पसीने की बूंदें चमकने लगी ,इंस्पेक्टर की आंखे और पैनी हो चली |

“बेटा बस पूछ रहें हैं हमारी ड्यूटी है ,घबराओ नहीं ,हमें बताना तुमने मम्मी के साथ क्या क्या मजे किये ” आवाज में मीठापन भरते हुए इंस्पेक्टर ने बिट्टू को अलग ले जाकर पूछा |

बड़े दिन के बाद बिट्टू को कोइ याद लायक दिन याद आया | मम्मी के साथ कितने मजे किये थे उस दिन ! पता नहीं पापा को लोग कहाँ ले गए हैं ,उन्हें ऐसे क्यों लिटा रखा था ,सब बोलतें हैं वो कभी नहीं आएंगे ,माँ से इस बारे में बात करूँगा | पुलिस अंकल को अगर सही बताया तो शायद यह पापा को वापस लाने में मदद कर दें ,बिट्टू ने मुँह खोला ” मम्मी और मैंने खूब मजे किये ,और दिनों से ज्यादा !उस दिन मम्मी ने मुझे चिप्स भी खिलाये वैसे वो उसके लिए मना करती है हमेशा | उस दिन मैंने कहा भी अब घर चलते है पर मम्मा ने मुझे और थोड़ी देर तक झूले पर झुलाया ,हमने आइसक्रीम भी खाई फिर हम घर आ गए अंकल ! “इंस्पेक्टर को बिट्टू की सारी बातें किसी साजिश की तरफ इशारा करती हुई लगी | गाल पर प्यार से छूते हुए इंस्पेक्टर ने उसे टॉफी भी दी |

सामने गुप्ता पडोसी के cctv फुटेज से पता चल गया कि रजनी स्कुल से घर आयी थी | संदेह के आधार पर रजनी को गिरफ्तार कर लिया गया | इंस्पेक्टर ने दलील दी कि उस दिन चिप्स खिलाना भी रजनी की सोची समझी साज़िश थी | गवाह बनाने के लिए चिप्स को मना करनेवाली रजनी ने उस दिन चिप्स ख़रीदे थे | रजनी की सारी दलीलें कि घबराहट में वो झूठ बोल गयी ,अनसुनी कर दी गयी | फिर उसने कहा आप उनके फ़ोन रिकॉर्ड क्यों चेक नहीं करते ,मुझ बेगुनाह को फंसाकर उसे क्या मिलेगा ?

बिट्टू को लेकर दादी पहले ही चली गयी थी ,उन्हें पुलिस ने पहले ही इन्फॉर्म कर दिया था |

“हमें अपना काम मत सिखाइये ,उसकी रिपोर्ट भी जल्द आ जाएगी ” रजनी ने अपने भाई को सारी जानकारी दी और पुलिस उसे जीप में बैठा कर चली गयी |

फ़ोन का रिकॉर्ड इंस्पेक्टर के हाथ में था किसी सुधा का नाम बार बार आ रहा था | फ़ोन पर की गयी लास्ट कॉल भी उसकी ही थी | इंस्पेक्टर ने सुधा से बातचीत की | उसने उसे बताया कि दोनों एक ही कंपनी में काम करतें है ,और आजकल कंपनी की कंडीशन ठीक नहीं चल रही है तो इसी वजह से ही बातें हुई “शब्द उसके चेहरे का साथ नहीं दे रहे थे | फ़ोन पर मिले सबूत कुछ और कह रहे थे | थोड़ी सी सख्ती से सुधा टूट गयी |

“हाँ यह सही है कि मेरे उसके साथ सम्बन्ध गहरे थे ,वो अपनी पत्नी को छोड़कर मुझसे शादी करना चाहता था | आप बताओ उसे मारकर मुझे क्या मिलेगा | उसके ज़िंदा रहने में मेरा फायदा है या मरने में ? सुधा गिड़गिड़ाई |

वो सबूतों के आधार पर हम तय करेंगें “इंस्पेक्टर ने गहरी आवाज में कहा |

जमानत पर रजनी और सुधा बाहर थे पर शक का घेरा अभी भी उसपर कसा था | पुलिस जितना सबूत खंगालती ,दोनों में से ही कोई शक के घेरे में आता पर पक्के सबूतों के बिना पुलिस उनपर हाथ नहीं डालना चाहती थी | सूक्ष्म सबूतों को भी नहीं छोड़ा जा रहा था | वैसे ही किचन में चाय बनाते समय दिनेश के गले पर पीछे से किये गए प्राणघातक चाकू के गहरे घाव ने उसकी जान ले ली थी | बड़ा सा किचन नाईफ़ बिना उँगलियों के निशान के डस्टबिन में पड़ा था | सबूतों के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की गयी थी| फिर पुलिस के हाथों आयी इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट जो शायद दोनों में से किसीके हाथों से गिरी हो | शायद दिनेश सिगरेट पी रहा हो और अचानक पीछे से किये गए वार से उसके हाथों से छूट गयी हो | रजनी ने भी उसके इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट पीने की बात मानी है | यह क्या कोइ सबूत बन सकता है कि बस एक अटकलबाजी है ,सोंचता हुआ रवि इंस्पेक्टर रजनी से पूछताछ कर बाहर निकला | अचानक से उसकी नजर भोला पर पड़ी | सूरज तेजी पर था सब अपने घर में दुबके पड़े थे और भोला सामने आम के पेड़ पर पत्थर से निशाना साध रहा था |

भोला ! आम पर निशाना लगा रहा है ? इंस्पेक्टर गड़बड़ाया |
यहीं तो इसकी जगह फिक्स है , चश्मा पहने 15 साल के मासूम भिखारी भोला को वो कितनी बार अँधा समझ कर वो पैसे दे चूका है |

“मैं निशाना लगा दूँ ” इंस्पेक्टर ने पूछा |
चौंक कर भोला ने पीछे देखा और घबराकर भागने लगा ,पर वो इंस्पेक्टर की पकड़ में था और थोड़ी देर बाद पुलिस चौकी में |

“तू वही अपनी धुनि रमाये बैठता है ,सच बता कुछ नहीं होगा, नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं भोला ,तूने उस इंजीनियर के घर में उसके हत्या के आगे पीछे कुछ अलग सा देखा हो तो बोल ,इंस्पेक्टर ने उसे एक घुड़की दी तो उसकी मुँह की रेल गाड़ी चालू हो गयी |

“साहब फूल सिनेमा चलता है उस घर में | मेमसाहब छुट्टी में जब बच्चे के साथ गायब तो दूसरी मेमसाब रसोई के रास्ते घर में घुसती है ,कभी उसी रास्ते निकलती भी है | उस दिन सुबह रजनी मेमसाहब वापस आया थोड़ी देर में वापस गया ,पसीने से तरबतर ,वहीच मारा होगा दिनेश बाबू को ,था तो घटिया आदमी बाबू | पर एक बात कल कोई रजनी मेमसाहब के जाने के बाद दूसरी मेमसाब तो नहीं आयी पर एक ड्राइवर आया था सब्जी का थैला लेकर रसोई से गया और फिर15 -20 मिनट में वो भी निकल गया | मुझे भूख लगी थी सो ज्यादा नहीं देखा मैंने “एक सांस में बोल गया भोला |

इंस्पेक्टर के लिए यह नयी बात थी कि सुधा के पास भी घर की चाभी है | वो तुरंत सुधा के घर निकल गया | साथ में रोज रहनेवाले सिपाही भी संग हो लिए }| पुलिस की गाड़ी उसके घर के सामने रुकी तो वैसे ही लोग ताक झांक करने लगे |

“यह नार्मल पूछताछ है ,आज हमे यह पता चला कि आप बाहर ही नहीं घर में भी दिनेश से मिलती जुलती थी ,आपके पास घर की चाभी थी ,आपने नहीं बताया ?
” हाँ सर थी मेरे पास ,मैंने सोचा ,यह मामूली चीज है जब आपस में प्यार का रिश्ता हो पर अब यह चाभी वेबजह मुझे मुसीबत में डाल देती इसलिए नहीं बताया “सुधा ने झेपते हुए कहा |

मामूली बात है कि यह सोंचना हमारा ……… अभी इंस्पेक्टर की बात पूरी भी न हुई थी कि सुधा के फ़ोन की घंटी बजी |

“हाँ पुलिस आयी है ,नार्मल पूछताछ है ,तुम हर बात में अपनी टांग न घुसाया कर ,पहले भी कहा है तुमसे ” सुधा की आवाज तल्ख होने लगी …….. क्या कह रहे हो ?चाचाजी बोल रहे हैं ,अच्छा आ जाओ ” सुधा ने अपनी स्वीकृति दे दी|

“इंस्पेक्टर साहब हमारे पड़ोस में ही यह परिवार कुछ 8 वर्षों से रहता है ,जब से मेरे माँ -बाबा नहीं रहे ,चाचा जी को मेरी चिंता रहती है अब पुलिस केस हो गया है तो बड़े बैचैन हैं ,अपने बड़े बेटे को भेजने को बोल रहे है ,आपको ऐतराज़ न हो तो वो यहाँ आ सकता है ? सुधा ने पूछा |

“अगर वो किसी तरह दिनेश से मिला हो और ऐसी गवाही दे सके जिससे इनवेजिस्टिगेशन में कुछ मदद मिले तो क्यों नहीं ” इंस्पेक्टर ने अनमने भाव से हामी भरी |

लम्बे कद का 32 साल के आस पास के युवक ने उनसे अंदर आने की इजाजत मांगी | इंस्पेक्टर ने हामी में सर हिलाया |

सुधा से उसके प्रश्न चालू थे ” आपको कैसे लगता था कि दिनेश आपको धोखा नहीं दे रहा ,ऐसा भी हो सकता है न कि आपको धोखे की भनक लग गयी हो और गुस्से से आपने उसपर वार कर दिया हो ,वार इतना खतरनाक हो कि उसकी मौके वारदात पर ही मृत्यु हो गयी हो ” इंस्पेक्टर ने अपनी पैनी नज़र जमाई| अखबार के साथ इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट रखी हुई थी ,जिसपर इंस्पेक्टर की आंखे पड़ी |

“नहीं सर ,मैं फिर से कहूँगी कि उसने मेरे साथ कोई धोखा नहीं किया ,और न ही मैंने उसके साथ। ..मैं और दिनेश जल्द शादी करने वाले थे ,हैं न सतीश तुम ही बताओ “सुधा ने सतीश की मदद के लिए देखा |

“मैं क्या बोलूं सुधा तुम शुरू से ऐसी ही थी | तुम्हे याद है जब तुम कॉलेज में थी ,हमारी गली में एक कुत्ते ने आदत बना ली थी हर स्कूटर के पीछे भागने की तब भी तुमने उससे सहानुभूति ही रखी थी ,भूखा होगा तभी दौड़ता है स्कूटर के पीछे | तुमने रोटी भी उसे खिलाई थी ,तुम्हे लाख समझाया कुत्ते कुत्ते ही होते हैं ,तुम फिर भी नहीं मानी| आखिर मुझे ही उसे बोर में बंद कर दूर छोड़ आना पड़ा | तू मुझसे कितना लड़ी थी, पर उसके बाद तू आराम से गली में बेख़ौफ़ आ जा सकती थी | याद है तुझे वो केमिस्ट्री का टीचर जो तेरे को प्रोजेक्ट सबमिट करने को टाइम नहीं दे रहा था ,ईश्वर की कृपा हुई ,उसके बाइक की टक्कर किसी कार से हुई ,एक महीने हॉस्पिटल में रहा होगा बूढा ,उसके जगह आये प्रोफेसर ने तुझे टाइम दिया था तब तेरी डिग्री हो पाई थी | इंस्पेक्टर क्या कहूं यह हैं एकदम वेबकूफ ,देख बुरा नहीं मानना ,पर सच है ,यह मुसीबत में पड़ती है तो ईश्वर बनकर कोई आता है तभी यह बचती है| यह सब बेवकूफियां देखकर शादी तक का प्रपोजल दे चूका हूँ इसे पर हंसी में उड़ाती है यह मेरी बात | वैसे मैं इसे समझाता ही रहता हूँ , सही गलत की कोई बात ही इसे समझ नहीं आती ! अब देखिये शादीशुदा दिनेश इसका नाजायज फायदा उठाने वाला ,इसे कभी गलत लगा ही नहीं ” एक साथ बिना रुके बात करने से माथे पर पसीने की बुँदे दिखने लगी |
सतीश इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट की और बढ़ा |

सतीश की बातों से अवाक् सुधा ने कहा “यह मेरी वाली है ,तुमने अपनी कहाँ रखी ?
कही गिर गयी है “सतीश का जवाब था |

गिरहें अब इंस्पेक्टर को सुलझते दिखने लगी |

–अमृता श्री

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Photo by Pixabay on Pexels.com
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