मृगतृष्णा

 

मृगतृष्णा

उसकी नज़रें धोखा नहीं खा सकती थी | वो रजनी ही थी | रमाकांत की नजर जैसे उधर ही ठहर कर रह गयी | उसके बालों में  गहरे भूरे रंग की डाई लगी हुई थी ,जो बता रही थी कि उसपर उम्र की छाप उस पर पड़नी शुरू हो गयी थी|57 की आयु में भी रमाकांत को अच्छे से याद है कि उसने उसे किस तरह चाहा था ,अपनी जीवन संगनी बनाने के ख्वाब भी देखें थे | बिंदास स्वाभाव की रजनी बाकि लड़कियों से हटकर थी और शायद इसलिए वो उसके सपनों में बस गयी थी | रमाकांत शांत स्वाभाव का था और खुलकर अपनी बातें कुछ दोस्तों को ही कह पाता था | दिनेश उसकी करीबियों में से था तो उसके कहने पर एक बार हिम्मत करके अपनी बात रजनी से कह भी डाली |

अभी भी उसे याद है ,उसने नज़र नीची कर के कहा था ” मैं तुम्हे अपनी जीवन साथी बनाना चाहता हूँ ” कहते हुए पसीने से भींग गया वो !
रजनी के शायद  ऐसे कई प्रोपोज़ल्स आ गए होंगे ,वो अपेक्षाकृत  शांत थी पर उसकी आँखों में आंखे डाल कर वो बोल उठी थी “रमाकांत शादी मेरी मंजिल नहीं ,मैं किसी मिडल क्लास घर  को संभालने और बच्चे पालने में अपनी ज़िंदगी नहीं बिताना चाहती | उसके इन शब्दों ने रमाकांत को झटका तो दिया था पर उसे समझ आ गया था कि रजनी और उसकी मंज़िल एक नहीं है |
माँ- बाप के कहेनुसार उसने शादी भी की और उसकी पत्नी सरला अपने स्वाभाव की तरह सरल थी | माँ- बाप को उससे कोइ शिकायत नहीं रही और न ही उसे!घर गृहस्थी अच्छे से चलने लगी | उसमे हमेशा उस आग को वो मिस करता रहा जो उसे रजनी में दिखी  थी | खुद में संतुष्ट सरला को देखकर उसे खीज हो उठती | आखिर क्यों वो हमेशा कम में ही संतोष कर लेती है पर रजनी की बातों ने उसमे एक ज़िद भर दी | वो मेहनत करता गया और अपना कारोबार बढ़ाता गया | कम में जीनेवाली सरला को अंतर तब भी पता नहीं लगा जब हाथ रिक्शे से वो मर्सिडीज में आ गयी | आज भी वो सब्जी के भाव तौल करने में चूकती नहीं थी ,वो उसे समझा समझा कर थक गया था पर उसके अंदर की औरत से वो हार गया था | उसने उसे समझाना छोड़ दिया था | हाँ उसके जाननेवाले और बिजनेस क्लास में उसका एक नाम हो गया था जिससे उसका अहम् संतुष्ट हो जाता |

उसके बेटे  राहुल की शादी हो गयी थी ,पर ना जाने क्यों रमाकांत की नजरों में वो बेवकूफ ही रहा | जब भी  उससे उसने कारबार से सम्बन्धित कोई सवाल पूछे उलटे सुलटे जवाब देकर वो बच कर निकल गया | अब उसकी शादी हो चुकी है ,रमाकांत बहु के सामने तो उसे कुछ नहीं कहता पर अकेले में अपनी बीबी पर बरस उठता ” अपनी तरह बौड़म बना डाला है तुमने इसे !
कुछ दिन पहले उसके दाएं हाथ दिनेश उसके कॉलेज का मित्र जो अब तक का उसके सुख दुःख का साथी था ,उसके बिजनेस में उसका पक्का सलाहकार ,हृदयाघात से अपनी जान गवां चूका था | उसका जाना उसे रीता कर गया | अचानक उसे अपने भविष्य की चिंता होने लगी | इतनी समझदारी से बनाया गया यह बिजनेस एम्पायर अब उसे ढलते हुए दिख रहा था | अगर उसे कुछ हो गया तो क्या होगा उसके परिवार का ? अपनी पत्नी और बेटा को वो परख चूका था ,बहु भी उसे अपनी पत्नी सी ही घरेलू लगने लगी थी | इसमें कोई बुरी बात नहीं थी ,पर उसके बिजनेस की नीव चरमराती हुई दिख  रही थी |

काफी शॉप में रजनी अपनी कुर्सी से उठकर जाने के क्रम में थी ,उसकी मीटिंग खतम हो रही थी और रमाकांत की तीसरी कॉफी भी !
विचारों के जाल से निकलकर वो रजनी की तरफ बढ़ा | वो जितने गर्म जोशी से  उसकी तरफ बढ़ा और  उसे बताना पड़ा कि वो उसके कॉलेज का मित्र रमाकांत है ,रजनी का  रिस्पांस उतना ही ठंडा था |

नाइस  मीटिंग यूँ ” कहकर इस मुलाकात को यही खतम करना चाहा|
इतने में उसके बॉस मिस्टर नितिन ने रमाकांत को पहचाते हुए कहा ” मिस्टर रमाकांत लक्ष्मी इंफ़्रा ग्रुप के चेयरमैन,रजनी इनके फर्म के साथ ही तो हमारी मीटिंग नेक्स्ट वीक फिक्स्ड है | अहोभाग्य आप हमें ऐसे मिल गए” चाटुकारिता साफ झलक रही थी |

रजनी के व्यवहार में अचानक से परिवर्तन दिखा|अचानक ऐसे अपनी बॉस की नज़र में उसके चिपकू कॉलेज की साथी की वजह से उसका मान जो बढ़ गया था|उसे तो अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था|

रमाकांत की दरियादिली की वजह से वहां सबमे फिर से मीटिंग हुई | इस बार जहाँ उसके बॉस रमाकांत कहकर उसके मस्के लगा रहे थे वही रमा पुरे अधिकार से उससे बातें करती रही जैसे उसे बरसों से भूली नहीं हो |रमाकांत ने इस बात को नोटिस किया पर रजनी उसके सामने बैठी थी उसके लिए उस समय उतना काफी था |  खैर! उनकी कपनी के साथ औपचारिक वार्ता का होना  चार दिनों बाद तय हुआ | रमाकांत को अपने ससुराल में अपने भांजे की शादी में जाना पहले से तय था ,जिसे वो अब रोक नहीं सकता था |

भांजे की शादी में रमाकांत रजनी और अपनी पत्नी की तुलना में लगा रहा | उसकी पत्नी शादी जैसे बड़े कार्य की जिम्मेदारी  को कितनी आसानी से अपने कंधे पर डाल लेती है ,वही रजनी ने बाहर के कार्यो में अपना नाम बना लिया है | दोनों की कोई तुलना भी नहीं है ,पर रजनी उसे फिर भी थोड़ी ज्यादा गुणवान लगी | शायद दोस्त दिनेश की मौत और अपने भविष्य की चिंता ने उसकी सोंच शिथिल कर दी थी |

रजनी के कम्पनी का प्रपोजल इतना अच्छा नहीं था पर उससे उसे कोई नुक़सान  भी नहीं हो रहा था | अधिकतर जिस प्रपोजल को अमूनन वो मना कर दिया करता था,आज उसने बड़े मन से हाँ कर दी | रमाकांत का सेक्रटरी अपने बॉस के इस फैसले से हैरान था |

रमाकांत इसी बहाने रजनी को परखना चाहता था | इस कार्य के सिलसिले में उसका आना जाना होता रहेगा और वो अच्छे से जान लेगा | तीव्र बुद्धि वाली नजरों को रमाकांत की आँखों ने खूब परखा | इस प्रोजेक्ट खतम होने के बाद उसने उसे अपनी कंपनी में काम करने का ऑफर दिया क्युकी पिछली कंपनी से उसके काम का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो रहा था ,जिसे रजनी ने आगे बढ़कर हाँ कह दी |
ऐसे 6 महीने गुजर गए | रमाकांत रजनी को ऑफिस संभालता देख अपनी बिजनेस की और से निश्चिन्त हो चला था | बॉस पर उसके प्रभाव बढ़ता देख बाकि कर्मचारियों में रजनी के प्रति चाटुकारिता बढ़ती जा रही थी |

आज रमाकांत सरला की बेवकूफियों से नाराज था | उसके नाक के नीचे उसने और उसकी बहु ने पापड़ ,बड़े का काम करना शुरू किया था और उसे पता भी नहीं था | भला उसकी बीबी को यह सब छोटे काम की क्या जरुरत ?
“अरे थोड़ा दिमाग चलाओ ,इतना बड़ा बिजनेस चला रहा हूँ ,उसमे भाग ले सको ऐसा बनो | राहुल को कोर्स पर कोर्स करा रहा हूँ तुम्हे भी करा देता हूँ ,थोड़ी माँ-बेटे को अक्ल तो आये ” बड़बड़ाते हुए घर से निकल गया |
उसका मूड ऑफ़ देखकर रजनी पूछ बैठी कि क्या बात हुई और वो भी आज भरे घड़े सा फुट पड़ा | रजनी सारी बात सुनती रही | अपना लावण्य दिखाती हुई बोल पड़ी “रमा अच्छा होता हमारी शादी हो जाती ” अपनी बड़ी बड़ी आंखे उसपर जमाती हुई बोली |

उसकी बातें सुनकर रमाकांत को अच्छा तो लगा पर उसे वास्तिवकता का ज्ञान भी था |
“अब ऐसा होता तो क्या होता सोंचकर ज़िंदगी तो नहीं जी सकती रजनी ,अब समय आगे बढ़ चूका है और हमें भी बढ़ना चाहिए | पर हाँ जो तुमने मेरी कंपनी की सेवाएं ऐसे ही देती रही तो मैं इसे उधार नहीं रखूँगा ” बोलकर रमाकांत अपनी भावनाओं पर काबू करते हुए बोला |

रजनी को उससे ऐसे उत्तर  की आशा नहीं थी ,वो चुपचाप केबिन से निकल आयी |

कुछ एक हफ्ते बाद रमाकांत को ख्याल आया की उसका बेटा राहुल के कोर्स ख़तम होने में अभी 4 दिन रह गए  हैं | क्यों न उसे रजनी के अंदर काम करवाया जाये और तबतक उस डिपार्टमेंट की सारी जिम्मेदारी रजनी को दे दी जाये और इस सेवा के बदले रजनी को वो 10 लाख की रकम दे देगा |यह बात अभी रजनी से बात करनी जरुरी थी इसलिए रोज अपने  घर की तरफ मुड़ती  कार की दिशा उसने रजनी के घर की तरफ कर  दी |  ऑफिस से उसे घर दिया हुआ था तो वो आराम से अपार्टमेंट कॉम्लेक्स में गाड़ी पार्क कर लिफ्ट की और चला | लिफ्ट अभी पांचवां फ्लोर दिखा रही थी जबकि रजनी फर्स्ट फ्लोर पर ही रहती थी | जबतक लिफ्ट ऊपर से नीचे आएगी उससे पहले वो रजनी के सामने होगा सोंचकर सीढ़ी पर लम्बे कदम डालता वो आगे बढ़ गया | वो रजनी के फ्लैट 105 के दरवाजे तक पहुँचनेवाला था कि कोई शख्स अंदर से जोर जोर से बातें करता सुनाई पड़ा | उसके कदम वहीँ ठिठक गए |

” यह क्या रानी तुमने तो मुझे एकदम ही भुला दिया है ,यहाँ बनारस में जमकर बैठ गयी हो उस बुड्ढे  के साथ ? भूल गयी कितने रूपये उड़ाये हैं तुमपर ? आज ज़रा खाली क्या दिखने लगा, तुमने नया घरौंदा बना लिया | मुझे मामूली मत समझना अगर उड़ने देता हूँ तो पर कतरने भी आता है मुझे ,समझी तुम ? गुस्से में भरी आवाजें बाहर आ रही थी |

शायद वो गलत फ्लैट के बाहर है ,शायद रजनी 105 में नहीं 205 में रहती हो  ……..
अभी वो जाने को मुड़ा  ही था कि रजनी की जानी पहचानी आवाज उसके कानो से टकराई “जानू इतना गुस्सा किस बात पर हो ? अपना बिजनेस थोड़ा नीचे जा रहा था तभी तो यह सीढ़ी पकड़ी | जब अपने जमाने में कोई इंटरेस्ट नहीं था इस बूढ़े से ,तो अब होगा ? तुम ही हो सब मेरे ,बस मुर्गा तैयार कर रही हूँ ,हलाल करतें ही वापस आउंगी ,यह क्या दरवाजे में कुण्डी भी नहीं लगाई ? तुम्हे पता नहीं ख़जाना है इस घर में ” आज वासना में डूबी उसकी आवाज़ से घिन सी आयी |
“और मुझे अपने ख़ज़ाने को सहेजना तुमसे सीखना पड़ेगा ? वासना से भरे दो पैर दरवाजा बंद करने को बढे और रमाकांत लम्बी डेग  भरता हुआ सीढ़ियों की तरफ मुड़ा | उसे पता नहीं चला वो घर कैसे पहुंचा |

उसी रात रमाकांत की जबान लड़खड़ाने लगी ,आवाज अस्पष्ट सी निकलने लगी ,डॉक्टर ने इसे माइनर स्ट्रोक कहा| हॉस्पिटल में उसे तुरंत भर्ती कर दिया गया जिससे कुछ दिनों में उसके स्वास्थ्य में सुधार हुआ  और कुछ दिनों में उसे हस्पताल से छूती मिल गयी | हालत सुधरते सुधरते 15 दिन कैसे निकल गए उसे खुद पता नहीं चला| जब भी उसे अपने बिजनेस की चिंता होती सरला उसे मीठी सी डांट पिलाती और वो भी अब चिंता छोड़कर खुद को आराम देना चाहता था | आज बड़े दिनों के बाद रमाकांत अपने कमरे की आराम कुर्सी पर लेटा हुआ था |

” सुधांशु जी इस तरह की बेपरवाही मुझे बिलकुल सही नहीं लगती ,हमारे पास टाइम कम है ,हमें यह आर्डर जल्द पूरा करना है ,मैं अभी आधे घंटे में पहुँच रही हूँ ,राहुल जी (रमाकांत का बेटा और उसका पति )को एक बार पेपर दिखा दें ,वो इसे सैंक्शन कर देंगे | आप पेपर तो तैयार  रखिये ” बहु की रुआबदार आवाज रमाकांत के कान में पड़ी|
मैनेजमेंट पास बहु लाने का उद्देश्य ही यही था कि उसके इस बिजनेस को अपने कंधे पर बेटा बहु उठा ले पर जब उसे सरला के साथ रोटी सब्जी का चक्कर में फंसता देखा तो उम्मीद ही टूट गयी थी उसकी ! सरला को ही ले लो ,अगर उसने अपनी जिम्मेदारी कुशलता से नहीं निभाती तो क्या वो इतने आराम से अपना कारोबार संभाल पाता | बेटा सुबह से तैयार होकर जिम्मेदारियां निभा रहा है | उसने जब शुरुआत की थी तो कितनी ठोकरे खाई थी कई बार बजट गड़बड़ाया था पर सरला के चेहरे पर शिकन नहीं आयी थी | वो किस सहारे की तलाश में था ? वो किस मृगतृष्णा में फंसा हुआ था ,सब कुछ तो उसके पास ही था | उसकी आंखे अब भींगने लगी थी |

तभी उसकी तन्द्रा टूटी “भाभी जी बस यह वाला आर्डर पूरा कर दीजिये बड़ी ,पापड़ का यह कैंसिल नहीं कर पाया,बाकि कैंसिल होने में टाइम लगेगा पर कर दूंगा ” रामलाल सरला के आगे गिड़गिड़ा रहा था  और सरला उसे चुप रहने का इशारा कर रही थी ,उसे खुली खिड़की से सब साफ़ दिख रहा था | वो अपनी आराम कुर्सी से उठकर दरवाजे तक आया |

“आप आराम कीजिये जी ,मैं इन्हें जाने को ही बोल रही थी ” झेंपते हुए सरला ने कहा |

” रामलाल आर्डर कैंसिल करने की जरुरत नहीं बस थोड़े दिन के लिए टाल दो ,तबतक भाभीजी की कंपनी रजिस्टर हो जाएगी | तुम चिंता मत करो ,तुम्हे भी लाभ में पूरा हिस्सा मिलेगा | भाभी जी को अपनी कंपनी के लिए कम से कम चार और कर्मचारी अभी लगेगें ,तुम्हारी नज़र में कोई है तो बताना “रमाकांत की दृढ आवाज़ गुंजी |

अविश्वास से सरला की आंखे खुली की खुली रह गयी ,रमाकांत क्या कहता ,उसकी आंखे तो इतने सालों  बाद जाकर खुली थी ,आज बड़े दिनों बाद  सबकुछ वो सही सही  देख पा रहा था |

-अमृता श्री
Reema-Lagoo-3
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