छोटा घर ,छोटे लोग !

आज भी चुप रह गया वो ! अम्मा ने उसकी पत्नी रीमा को वे बजह डांट दिया | आजकल बुरा उसे भी लगता है जब वो रीमा की आँखों में पहले शिकायत और फिर आंसू देखता है ,और फिर उसकी ख़ामोशी झेलता है |

कभी वो उससे उलझ भी जाती है ” हमारी न सही ,हमारे अम्मा -बाबू का तो ख्याल करो , उनकी बेइज़्ज़ती सरे आम अम्मा कर डालती है सबके सामने और तुम्हे ज़रा सी नहीं खलती ? क्या हमारे माँ -बाप की तपस्या तुम्हारे माँ बाप की तपस्या से कम आंकते हो ?उसके कान सब सुनकर भी नहीं सुनते |

उसे लगता यह तो घर के टंटे हैं ,सास -बहु की तो चलती रहती है ,इसमें उलझे तो अम्मा बुरा मानेगी कि शादी के 6 साल में ही उसका बिटवा बदल गया |” दिल मेरा भी रीमा के लिए दुखता है पर बहुत सारी बातें है जो मेरी राहें रोकती है| सच है सात वचनो में बांध कर लाया था तुम्हे ,कई कसमें भी खाई थी ,दिल से साथ निभाया तुम्हारा, पर अम्माँ को कुछ न बोल पाउँगा ” खुद से ही बातें कर लीं महेश ने |

” क्या है ,ज़रा सी बात का बतंगड़ कैसे बनाते है ,कोई तुमसे सीखे ! बड़ी है अम्मा ,कभी चुप रह जाओगी तो गल नहीं जाओगी | ” शब्दों के तीर चुभाते हुए महेश कमरे से निकल गया |

आंसुओं के साथ आज भी वो अकेली रह गयी हमेशा की तरह !

गर्मी के छुट्टियों के कुछ दस दिन रीमा और छोटू, रीमा के मायके में बिता कर आज ही घर लौटें थे |

दिखा तो नानी ने तुझे क्या दिया ? एकलौता नाती है ,ज़रा बता तो ! शर्ट तो नयी लग रही है ,पर हाय कितनी सस्ती है|गरीब घर में ब्याहने का यही अंजाम होता है ,ना ढंग का खाना ,न ढंग के कपडे ! उतार इसे कोई देखे तो भद्द उड़ेगी मेरी|छोटा घर ,छोटे लोग !अम्मा ने मुँह सिकोड़ते हुए कहा |

” दादी पर नानी ने मुझे इतने प्यार से दी है ,छोटू अपने छोटे-छोटे हाथ फैला कर कहा | “दादी कहाँ है छोटा घर और छोटे लोग मुझे भी देखना है ,छोटू किसी कहानी का जिक्र समझ मचल पड़ा |

अपनी चुप्पी का असर छोटू तक पहुँचता देख ,महेश चौंक गया | ऐसे तो बड़ों के प्रति सारा सम्मान ही खो जायेगा एक दिन | अभी भी समय है कि वो अपनी गलती सुधार ले |

“अरे बेटा छोटा घर हो सकता है ,लोग कभी छोटे नहीं होते !” महेश ने अम्मा की तरफ देखते हुए कहा |

अम्माँ की आँखों ने महेश की आंखे और निर्देश समझ लिए और उन दोनों के आँखों का भाव रीमा की आँखों तक भी पहुंचा |

मेरे विचार : कभी किसी के सम्मान को चोट न पहुँचने दें ,यह रिश्तों में दूरियां ले आता है |

-अमृता श्री 50641902_842811856053273_8097952479154536448_o

Advertisements

2 Comments

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s