दिल ख़ामोश सा दरिया है|

लोग कहते है कि, है पत्थर सा ,सख़्त लगता भी बहुत है ,
पर दोस्तों , मेरा दिल ,जरा सी बात पर पिघलता भी बहुत है |

वैसे तो कई दोस्त है ,तेरे दिल के करीब “श्री ” ,
लेकिन न जाने वो ही क्यों तुझको याद आता भी बहुत है !

तहज़ीब के दायरे में “श्री “सह जाती हो तुम भी बहुत कुछ ,
होठ रहते है ख़ामोश मगर दिल तेरा दुखता तो बहुत है !

मत सुन रोज किसी की ,आज अपनी भी सुना कुछ ,
दिल ख़ामोश सा दरिया है पर कहता तो बहुत है |

Written by -Amrita Shri

woman wearing teal long sleeved shirt
Photo by Ana Francisconi on Pexels.com
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