भारी अंगूठी

आज घर में उत्सव सा माहौल है | अभी अभी कुछ महीने पहले बैंक की नौकरी ज्वाइन किया था सीमा ने और आज उसके लिए  एक बड़े शहर में काम करने वाले सरकारी ऑफिसर के विवाह का प्रस्ताव आया है |

” बेटा तू तो हर गुण से भरी है ,कोशिश कर लेना जिस शहर में लड़का है उसी शहर में तुझे ट्रांसफर मिल जाये नहीं तो वहीँ कुछ देख लेना “माँ ने अपनी बात कही|

लड़का अच्छे खाते पीते घर का है ,फिर उन्हें तुम्हारे नौकरी से भी कोई प्रॉब्लम नहीं “माँ अभी भी इसी धुन में बोले जा रही थी कि उनकी बात बीच में ही काटकर पिता बोल पड़े “एक बार मिल लेने दो आपस में दोनों को फिर कुछ फाइनल हो पायेगा |

सीमा उधेड़बुन में लगी थी ,लड़के का फोटो तो उसे पसंद आया था फिर लड़का दिल्ली जैसे जगह में पोस्टेड था ,उसे शायद इतनी ज़द्दोज़हद ना करनी पड़े ,अपना ट्रांसफर लेने में।

मन भी सपनो में गोते लगाने लगा फिर सपनों पर लगाम कौन लगाता? तुरंत अपनी खास सहेली रिद्धिमा को फ़ोन लगा बैठी| रविवार का दिन था तो उनकी बातें खतम होने का ना ही नहीं ले रही थी | दोनों खुसुरपुसुर माँ के कानो में भी पड़ी तो उन्होंने उसे अपने पास बिठाकर बोला “लाडो दो चार दिन की छुट्टी ले ले तू ,तुझे पार्लर ले चलती हूँ ,थोड़ा रिलैक्स कर ताकि चेहरा खिला खिला रहे| “माँ ने लाड से उसके बालों में उंगलिया फेरी।

रिश्ता रीता बुआ लेकर आयी थी | बुआ अभी साथ ही हैं तो वो भी क्यों चूकती “बिटिया तेरे बाल ही लड़के को भा गए ,अच्छे से धो कर ,क्लिप डालकर खुले ही छोड देना तू ”

सब कुछ नया नया था ,पर अच्छा लग रहा था | वो भी दिन आया जब उसके होने वाले पति राकेश उसके सामने थे| दोनों को एक समय भी साथ दिया गया |

तुम मुझे पसंद हो ,और इंडिपेंडेंट रहना चाहती हो ,यह और भी अच्छा है | दिल्ली जैसी जगह में दोनों कमाए तो एक साथ मिलकर कई सपने पुरे किये जा सकते हैं | बैंक में तो कई तरह के ऑफर्स उसके एम्प्लाइज को मिलते है और मेरी सरकारी नौकरी भी मुझे कई सुविधाएँ देती है ,हम एक खुशहाल जिंदगी के सपने देख भी सकते हैं ,बोलो साथ चलना चाहोगी जिन्दगी के सफ़र में मेरे साथ “कहते हुए राकेश ने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया |

एक अनोखा सा अहसास था यह ! बातें बड़ी रियलसिटिक लगी जो मन को ज़रा अभी चुभी ही थी कि राकेश का स्पर्श उसे मोहित कर गया।  सीमा के विवेक पर भावनाओं का कब्ज़ा हो गया |

सीमा का मन उसे समझाने लगा कि जिंदगी फ़िल्मी तो नहीं होती नहीं कि वो उसकी आँखों में अपनी गहरी आंखें डाल कर बोलता ?क्या हुआ जो उसने दिल की बात सीधे सीधे बिना लाग लपेट के कह दी | उसकी सपनो की दुनिया रंगीन हो चली थी|

जल्द सगाई भी हो गयी | सगाई में राकेश ने सीमा को सोने की अंगूठी पहनाई थी।

दूसरे दिन जब केवल घरवाले ही थे ,उसकी अंगूठी की बड़ाई करते हुए रीता बुआ ने कह डाला “बिटिया अंगूठी तो बहुत भारी है ,तेरी नाजुक उँगलियों के लिए “फिर घर पर सब उनके साथ हंस पड़े | चारों तरफ ख़ुशी का माहौल था|

पापा ने कह डाला “ऐसे किसी ने सामने से तो कुछ कहा नहीं पर अपनी बच्ची को गाड़ी ज़रूर दूंगा | बहुत सारी कारें मेरे बजट में भी हैं ,देखता हूँ क्या बुक करूँ कि शादी में बड़े शान से राकेश बाबू को चाभी थमा दूँ और सबके सामने वो इसके लिए मुझे ना भी नहीं कर सके “बात बोलकर खुद ही खुश हो बैठे बाबा |

“अभी एक लड़की और है ब्याह को ,ऐसे खर्चे न जोड़ो ,उससे अच्छा बच्ची के हाथ में पैसे दे देंगे हम “अम्मा ने अपनी बात रखी | दोनों में एक नोक-झोंक सी छिड़ी तो रीता बुआ भी उसमे शामिल हो गयी ,सीमा ऐसे ही तीनो की बातों का मजा ले रही थी | उसे पता था जॉब के कुछ सालों में ही वो खुद अपने पैसों से गाड़ी ले सकती है | अभी की बात तो सिर्फ यूं ही चल रही है ,बात धीमे होने पर वो पापा को मना लेगी |

अब राकेश से उसकी बातें होने लगी थी | उसके फ़ोन का इंतज़ार रहने लगा था उसे |

आज पापा का मोबाइल बजा देखा राकेश लाइन पर थे एक मन किया की डाइनिंग टेबल पर रखे पापा के फ़ोन में बजती रिंग का वही जबाब दे पर उसने खुद को रोक लिया | पापा को फ़ोन की तरफ आते देखा तो वो सीढ़ी की ओट में हो गयी | कुछ समय सामान्य बातचीत के बाद पापा की आवाज उसे सुनाई पड़ी “बेटा अब तो शादी के दिन नजदीक आ रहे है ,कार्ड छपने को भेजे जा चुके है ,शादी का इतने खर्च के बीच में मैं आपके फ्लैट ले लिए 15 लाख और एक लग्ज़री कार का इंतज़ाम कैसे कर पाउँगा ? मैं जानता हूँ कि आपके साथ बिटिया खूब सुख से रहेगी ,आप ठीक कह रहे है ,पर कुछ साल दो साल में रिटायर होने वाला हूँ ,एक और बिटिया ब्याहने को तैयार है ,आप ज़रा इसपर विचार करें “पापा की आवाज गिड़गिड़ाती सी लगी |

सीढ़ी की ओट से सीमा बाहर आ गयी | पापा ने उसे सामने पाकर फ़ोन काट दिया |

सीमा के प्रश्नभरी आँखों को देखकर पापा वही डाइनिंग चेयर पर ही सर पकड़कर धमम से बैठ गए |

“यह सब क्या हो रहा है पापा ,मुझे क्यों नहीं बतायी यह बात ” सीमा की आंखे भर आयी थी |

शायद यह कुछ दिनों से चला आ रहा है ,बहुत सारे समय ऑफिस में बिताने की वजह से कितनी बातें घर में दबी दबी चल रही है उसे इसका कभी पता ही नहीं चला | आज छुट्टी के दिन सारी गुत्थी सुलझती दिख रही है | क्यों राकेश उससे पूछता रहता कि इस रिश्ते से वो आज खुश है न ? सब कुछ वो उन दोनों की भलाई के लिए ही वो कर रहा है | आजकल माँ-बाबा के चेहरे भी क्लांत क्यों लग रहे थे ,उसे लग रहा था कि शादी की तैयारियों की वजह से ! रीता बुआ भी अपने लाये रिश्ते की आजकल डींग नहीं मारती | कितना कुछ चल रहा था साथ साथ और वो कितनी बेखबर थी इन सबसे !

“बिटिया तुम कितनी खुश हो इस रिश्ते से ,हम कुछ न कुछ करके सब इंतज़ाम कर लेंगे | तू इन सब बातों पर दिमाग न दे ,बस खुद पर ध्यान दे “पापा ने उसे आश्वासित किया |

सीमा चुपचाप अपने कमरे में गयी | वापस लौटी तो हाथों में उसकी सगाई की अंगूठी थी जो सुनहरे डिब्बे में पड़ी थी| पापा की तरफ उसे बढ़ाते हुए वो बोली “बुआ ठीक कहती थी पापा ,यह अंगूठी बड़ी भारी है ,उँगलियाँ दुखने लगी है अब ! इसे अब आप उन्हें लौटा आएं |

By -Amrita Shri

silver and gold wedding band
Photo by Goran Vrakela on Pexels.com

 

 

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