तो कोई बात बने !

कितना कुछ कह देती हैं ख़ामोश नजरें तेरी ,
कभी जुबा पर उन्हें ले आओ , तो कोई बात बने !

उँगलियाँ घुमाकर लिखती रहती हूँ जो ,हथेलियों पर तेरी ,
एक दिन तुम गर जो समझ जाओ तो कोई बात बने !

रातों को जगाने लगे है ख़्वाब मेरे, आजकल ,
आज चैन की नींद जो पाऊं ,तो कोई बात बने !

बेरुखी तेरी मुझमे ,एक नया विश्वास भरती है ,
किसी दिन तुम यह जो समझ जाओ,तो कोई बात बने !

रोज एक और कदम बढाती हूँ मंजिल की तरफ ,
साथ तुम भी गर चल पाओ तो कोई बात बने !

–अमृता श्री

photo of woman looking at the mirror
Photo by bruce mars on Pexels.com
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