तो क्या हुआ ?

तो क्या हुआ ,

जो तुम्हारे मापदंडो ,
पर खरी नहीं उतरती ?
तो क्या हुआ ,
जो तुम्हारे बेफिज़ूल नियमों
पर मैं नहीं चलती !

तो क्या हुआ ,
मुझमे परफेक्ट बनने ,
की कोई चाह नहीं ,
नम्बर लेने की रेस में भी ,
कोई भागमभाग नहीं !
तो क्या हुआ?

कौन जीत पाया है इस दौड़ को ,
पागलपन के इस होड़ को ,
जहाँ एक दूसरे को नीचे दिखाकर ,
कोई आगे बढ़ जाता है ,
फिर भी क्या वो इसे कभी जीत पाता है ?

मेरा अपना आकाश ,अपने पंख ,
नहीं भी रहे जो कोई मेरे संग ,
तो क्या हुआ ?
हो सकता है कभी ,
थककर ,
कपड़े समेटना टाल जाती हूँ ,
हो सकता है
कभी ,
दाल में नमक डालना भूल जाती हूँ |
तो क्या हुआ ?

मुझे इन मापदंडो में आंकना ,
तुम्हे किसने सिखाया ?
सालों से इनमे दबकर एक औरत ,
ने आखिर इससे क्या है पाया ?

मुझसे जो नाता जोड़ा है ,
तो कुछ ऐसे निभाओ ना ,
कभी देवता के जगह से हटकर ,
साथी बन जाओ ना !

परफेक्शन नहीं प्यार से ,
मैंने घर अपना सजाया है ,
सपनों को, उम्मीद की मिट्टी ,
में हाथों से लगाया है ,
तुम भी कभी इन्हें प्यार से ,
बढ़कर सहलाओ ना ,
साथी बन जाओ ना !

कभी कभी मेरी उलझन भी समझो ,
कभी झूठी मुठी मेरी तारीफ भी कर दो !
बालों को सहलाकर ,कभी गले लगाओ ना ,
साथी बन जाओ ना !

नया नया सफर है अपना ,
मुश्किलें तो आएंगी ,
हाथ पकड़कर साथ चलेंगे ,
तो उम्र कट जाएगी !
हाथ बढ़ाओ ना ,
साथी बन जाओ ना !

photo of woman in white dress and beige scarf posing

Photo by Deden Ramdhani on Pexels.com

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