शिकवा

तेरी यादों में खुद को भुलाये बैठे हैं ,
दिल को यह क्या रोग लगाए बैठे हैं ?

उन्हें हर बात पर शिकवा है, हर बात पर गिला ,
और हम हैं कि हर बार खुद को आजमाए बैठे हैं |

उसकी आँखों में कभी डूबेंगे कभी तैरेंगे ,
सपने भी आजकल यही सपना सजाये बैठे हैं !

हर सितम लगे आखिरी सितम हो उनका ,

सोचकर हम भी यहाँ डेरा जमाये बैठे हैं !

BY अमृता श्री

woman holding pink tulips
Photo by Đàm Tướng Quân on Pexels.com

 

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