चाय पर जमी परत

भाभी आपने फिर से आलू टमाटर की सब्जी रसेदार बना दी ,मुझे सूखी  पसंद है इसलिए घर में हमेशा सूखी बनती है ,आज मेरी परीक्षा है और ! ” मुँह बनाकर ननद रानी निधि ने सीमा  की तरफ देखा | सीमा का मुँह छोटा सा हो गया |

“लाख याद रखने की कोशिश करती है वो इस घर के चलन को ,कुछ न कुछ गलती हो ही जाती है “अगली बार याद रखूंगी मैं , अब हंस दीजिये ,ख़ुशी ख़ुशी एग्जाम देकर आइये ” सीमा ने माहौल हल्का करने की कोशिश की | निधि उसे देखकर बाय करके निकल गयी |

“बेस्ट ऑफ़ लक ” सीमा ने जोर से कहा |

कमरे में बैठी उसकी सास रमा देवी ने मुँह बिगाड़ते हुए बुदबुदाया ” कहाँ से यह लड़की को ब्याह लाई मैं ! अपनी सखी की बातों में आ गयी | घर परिवार अच्छा है तो मुझे क्या करना था इसके घर परिवार से ? मुझे तो अच्छी लड़की चाहिए थी ,वही नहीं मिली ,हर दिन कोई न कोई गलती कर ही देती है ,अब कल ही की बात है ,तुलसी में दीया रखना भूल गयी|चार महीने होने आये ,अब कितना समय दूँ इस अल्हड को! इसकी माँ ने इसे कुछ नहीं सिखाया|

खुद से बड़बड़ाते देख कर ससुर दीना नाथ ने आवाज लगाई “क्या खुद से बातें किये जा रही हो ? चाय पीओ ”

अरे , मेरा दिमाग ख़राब हो चला है इस बहु से ,उसपर से आप ,आपको तो मेरी परेशानी से कोई मतलब ही नहीं ! चाय  ……..? आप भी ना ,आपको पता है न चाय ठंडी पीती हूँ ,आप भी अब नए बन जाओ ,बस  यही कमी है ! “रमा चिड़चिड़ाकर बोली |

अरे एक दिन गर्म पी लोगी तो क्या होगा “दीना नाथ ने रमा की चुटकी ली |

मुँह जलेगा और क्या ? आप तो चाहते ही हैं ऐसा ” रमा का सर अभी भी गर्म था |

अब दीनानाथ की गंभीर आवाज गुंजी ” तुम सब जानती हो ,मैं क्या बताऊँ तुम्हे ! तुम्हारा स्वाभाव ही हैं धर्य के साथ सही समय की प्रतीक्षा करना | मेरे इतने बड़े परिवार में जब तुम्हें पत्नी बनाकर लाया था तो तुमने कितने धर्य से अपनी जगह बनाई थी |

ठीक तुम्हारे चाय पीने की आदत की तरह ! चाय सामने होते हुए भी तुम उसे पीने लायक तापमान पर लाती हो ,फिर उसे जमे परत को अपनी उँगलियों से एक किनारे लगा कर धीरे -धीरे सिप लेकर उसका मजा लेती हो | हैं ना ?

इस बार रमा ने कुछ सोचते हुए सहमति में सर हिलाया |

वैसे ही बहु भी अभी अभी इस घर में आयी है ,उसे ज़रा समय दो ,तुमने महसूस किया होगा कि वो बदलने की कोशिश भी कर रही है अपने इस नए माहौल में ,उसे रास्ता दिखाओ ,सम्भालो और उसकी गलतियों को अपनी समझदारी से वैसे ही हटा दो जैसे तुम चाय पर जमी परत हटाती हो !

अभी हमारी निधि सिर्फ 15 साल की है और उसे इस घर में बनी टमाटर की सुखी सब्जी ही भाती है ,वैसे भी शायद बहु के  घर में  टमाटर की गीली सब्जी पकती हो ,जैसे वो हमे समझने की कोशिश कर रही है ,हमें भी उसे समझना होगा |

मुझे पता है तुम मेरी समझदार रमा हो ,जितनी कठिनाई  मेरी रमा को हुई थी मेरे परिवार का मन जीतने में ,मैं नहीं चाहता मेरी रमा की बहु को भी उसी दौर का सामना करना पड़े | अरे देखो ,हमारी बातचीत में तुम्हारी चाय पीने लायक बन गयी है ,देखो परत जम गयी ” सोच में पड़ी रमा को चाय की परत धीरे धीरे  हटाता देखकर दीनानाथ निश्चिन्त होकर पेपर पढ़ने में जुट गए |

किचन में बर्तन  साफ़ करती सीमा को पता ही नहीं चला कि रिश्तों में जमी परत खुरच दी गयी है |

By -अमृता श्री

 

 

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