रस्मे उल्फ़त

रस्मे उल्फ़त कुछ यूँ निभा गया कोई,
हँसते लबों से आंसू छुपा गया कोई !

तुमने हक में उससे कुछ ख़ास लम्हें  मांगे  ,
और हंस कर  ज़िंदगी लुटा गया कोई !

कसौटी पर तुमने हर बार उसे जांचा -परखा ,
और हर बार यह रस्म निभा गया कोई !

उसकी आँखों में एक बेबसी जो देखी ,
गम  भूलकर अपना ,उसे गले लगा गया कोई !

उसके चेहरे की लकीरों में दास्ताँ छिपी थी कई
आज फिर से  आँखों को रुला गया कोई !

-अमृता श्री

person blue eyes photography
Photo by Lisa Fotios on Pexels.com
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