दिल का रिश्ता

अपने हिस्से के जज्बातों को ,तू दबाता क्यों है ?
प्यार गर  दिल में नहीं है ,तो फिर जताता क्यों है ?

तुझसे जोड़ कर रखा है ,मैंने दिल का रिश्ता,
तू किसी मुब्हम में है तो, मुझसे छिपाता क्यों है ?

पाश-पाश जो हुआ दिल तो समेट लेना होगा ,

वक़्त तू मुझे ऐसे आजमाता क्यों है ?

शाम के ढलने से जमीन आज फिर उदास हुई ,
हर बार हाथों से यूँ सूरज फिसल जाता क्यों है ?

गैरों के हाथों कब हुआ है कोई तार -तार “श्री ”
हर बार कोई अपना ही मुझे आजमाता क्यों है ?

कठिन शब्द :
मुब्हम :उलझा हुआ.
पाश-पाश-चकनाचूर

–अमृता श्री

sunray through trees
Photo by Todd Trapani on Pexels.com

 

1 Comment

  1. Kya kahen shabd nahi hain mere paas……bahut bahut khubsurat rachna…..lajwab kavita.

    अपने हिस्से के जज्बातों को ,तू दबाता क्यों है ?
    प्यार गर दिल में नहीं है ,तो फिर जताता क्यों है ?

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