जुस्तजू

तेरी  जुस्तजू में खुद को संवारा करेंगे हम ,
यादों के जुगनुओं से तब तक गुजारा करेंगे हम !

प्यार के इस दरिया को हम पैमाने में क्यों मापे?
तेरी आँखों में  सनम खुद को उतारा करेंगे हम !

जब मैं और तू हो और दरमियान हो बस खल्वत,
किसी और का जिक्र भी तब क्यों गवारा करेंगे हम ?

मफ़्तूह होके आज तू दिल की बात कह “श्री ”

तेरे चेहरे पर घिरी सुर्ख़ियों का नज़ारा करेंगें हम !

-अमृता श्री

 

कठिन शब्द :

खल्वत :एकांत,

मफ़्तूह खुल कर बोलना

 

 

photo of person covered with brown textile
Photo by Noelle Otto on Pexels.com

4 Comments

  1. वाह। गजब का लेखन।

    प्यार के इस दरिया को हम पैमाने में क्यों मापे?
    तेरी आँखों में  सनम खुद को उतारा करेंगे हम !

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