एक बून्द स्याही सी ज़िंदगी!

एक बून्द स्याही सी ज़िंदगी ,
शब्दों के आगोश में मचलती सी ज़िंदगी !
थोड़ी कही ,थोड़ी अनकही सी ज़िंदगी !

दौड़ते भागते  थम गयी हो जैसे ,
थोड़ी  रुकी ,थोड़ी चली सी ज़िंदगी !
एक बून्द स्याही सी ज़िंदगी !
शब्दों के आगोश में मचलती सी ज़िंदगी !

चाहते आकर सुलगा गयी हो जैसे ,
कुछ जली कुछ बुझी सी ज़िंदगी
एक बून्द स्याही सी ज़िंदगी !
शब्दों के आगोश में मचलती सी ज़िंदगी !

रिश्तों से जुड़ा कोई धागा हो जैसे !
कुछ उलझी कुछ सुलझी सी ज़िंदगी
एक बून्द स्याही सी ज़िंदगी !
शब्दों के आगोश में मचलती सी ज़िंदगी !
अमृता श्री

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